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एनल (गुदा) कैंसर कोलोरेक्टल कैंसर से अलग होते हैं, जो सापेक्षित रुप से अधिक सामान्य होते हैं। दिर्घकालिक एचपीवी संक्रमण एनल (गुदा) कैंसर के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक होता है।
एनल (गुदा) कैंसर एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है जो एनल (गुदा) या एनल कनाल (गुदा नलिका) के ऊतकों में बनता है। लगभग 80% एनल (गुदा) कैंसर का निदान 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों में किया जाता है। 35 वर्ष की उम्र से पहले, पुरुषों में एनल (गुदा) कैंसर आम हैं; हालाँकि, आमतौर पर 50 वर्ष की उम्र के बाद, यह महिलाओं में अधिक देखा जाता है।
एनल (गुदा) कैंसर कोलोरेक्टल कैंसर से अलग होते हैं, जो सापेक्षित रुप से अधिक सामान्य होते हैं। एनल कनाल (गुदा नलिका) में ह्युमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) का संक्रमण, जो जननांग में गाँठ का कारण बन सकता है, एनल (गुदा) कैंसर के विकास के लिए यह एक प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। रिसेप्टिव (संग्राहक) एनल (गुदा) मैथुन भी एनल (गुदा) कैंसर की घटना से जुड़ा हुआ है।
साथ ही, इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज्ड (बाधित प्रतिरक्षा प्रणाली वाले) मरीज़ों, यानी एचआईवी और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज़ों और खराब रोगनिदान के मरीज़ों में एनल (गुदा) कैंसर के विकास का जोखिम अधिक होता हैं।
अक्सर, एनल (गुदा) कैंसर का पहला लक्षण रक्तस्राव होता है। एनल ओपनिंग (गुदा द्वार) पर खुजली यह एक और आम लक्षण है; हालाँकि, लोग इस लक्षण को बवासीर के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। इससे एनल (गुदा) कैंसर के निदान में देरी हो सकती है। निम्नलिखित कुछ अन्य लक्षण हैं जो एनल (गुदा) कैंसर से जुड़े हुए हैं:
एनल (गुदा) कैंसर का ठोस कारण पता नहीं है। फिर भी, एनल (गुदा) कैंसर के लिए कुछ जोखिम कारकों की पहचान की गई है। एनल (गुदा) कैंसर ह्युमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होने वाले यौन संचारित संक्रमण से निकटता से जुड़ा हुआ है। दिर्घकालिक एचपीवी संक्रमण को एनल (गुदा) कैंसर के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है।
निम्नलिखित कई अन्य जोखिम कारक हैं जो एनल (गुदा) कैंसर के विकास से जुड़े हुए हैं:
उम्र के साथ एनल (गुदा) कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
एनल (गुदा) मैथुन एनल (गुदा) कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाता है।
एक से अधिक यौन साथी होने से एनल (गुदा) कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
धूम्रपान एनल (गुदा) कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है।
सर्वाइकल (ग्रीवा) कैंसर, वुल्वर कैंसर या वजाइनल (योनि) कैंसर के इतिहास वाले लोगों में एनल (गुदा) कैंसर होने का जोखिम अधिक होता है।
इम्यूनोसप्रेसेन्ट्स लेने वाले लोग और एचआईवी संक्रमण जैसी इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज़्ड (प्रतिरक्षा प्रणाली बाधित करने वाली )स्थितियों वाले लोगों में एनल (गुदा) कैंसर विकसित होने का जोखिम अधिक होता है।
एनल (गुदा) कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए विभिन्न परीक्षण उपलब्ध हैं:
इस प्रक्रिया के दौरान, किसी असामान्य वृद्धि को देखने के लिए डॉक्टर दस्ताने पहनकर, उंगली पर लूब्रकन्ट (स्नेहक) लगाकर रेक्टम (मलाशय) के अंदर डालते हैं।
किसी भी असामान्यताओं को खोजने के लिए एनोस्कोप नामक, एक छोटी, प्रकाशित ट्यूब, एनल कनाल (गुदा नलिका) और रेल्टम (मलाशय) में डाली जाती है।
एनल कनाल (गुदा नलिका) का अल्ट्रासाउंड स्कैन ट्यूमर का पता लगाने में मदद करता है, इन्वेश़न की गहराई के साथ-साथ ट्यूमर के आकार का निर्धारण करने में भी सहायता करता है। इस प्रक्रिया के दौरान, एनल कनाल (गुदा नलिका) और रेक्टम (मलाशय) में एक प्रोब डाला जाता है, जो उच्च-ऊर्जा ध्वनि तरंगों का उत्सर्जन करता है जिन्हें कैप्चर किया जाता है और छवियों में परिवर्तित किया जाता है। ये छवियां मौजूद किसी भी असामान्यता के बारे में जानकारी प्रदान करेंगी।
डी. बायोप्सी: यदि कोई भी असामान्यता पाई जाती है, तो ऊतक का एक छोटा सा नमूना काटा जा सकता है और आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जा सकता है। एक बार जब उपरोक्त परीक्षण निदान की पुष्टि करते हैं, तब डॉक्टर कैंसर के स्टेजिंग का पता लगाने के लिए अतिरिक्त परीक्षणों की सिफारिश कर सकते हैं। क्या कैंसर लिम्फ नोड्स और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों में फैल गया है या नहीं यह पता लगाने में ये परीक्षण सहायता करते हैं। आमतौर पर कैंसर के स्टेजिंग के बारें में पता लगाने के लिए पेट / सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन अधिकतर सिफारिश किए जाने वाले परीक्षण हैं।
एनल (गुदा) कैंसर के लिए उपचार योजना तैयार करने से पहले, रोग का चरण, ट्यूमर का ग्रेड, मरीज़ की उम्र, मरीज़ की कुल स्वास्थ्य स्थिति और उनकी प्राथमिकताओं जैसे कई कारकों को ध्यान में रखा जाता है। एनल (गुदा) कैंसर के लिए उपलब्ध विभिन्न उपचार विकल्पों में रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा), कीमोथेरेपी और सर्जरी शामिल हैं। यह पाया गया है कि एनल (गुदा) कैंसर के मरीज़ों में उपचार की प्रतिक्रिया और नैदानिक परिणामों पर मल्टीमॉडल (बहुआयामी) दृष्टिकोण का सकारात्मक प्रभाव पडता है।
रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) के दौरान, कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को मारने के लिए उच्च-ऊर्जा रेडिएशन बीम (विकिरण किरणों) को ट्यूमर पर डाला जाता है। यह उपचार कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) में डीएनए संरचना को नष्ट कर देता है और इस तरह उन्हें मार देता है। रेडिएशन (विकिरण) को बाहरी रेडिएशन (विकिरण) स्रोत (लिनिअर ऐक्सेलरेटर) या आंतरिक रेडिएशन (विकिरण) स्रोत (ब्रेकीथेरेपी) का उपयोग करके वितरित किया जा सकता है। ट्यूमर के चरण, आकार और सटीक स्थान के आधार पर रेडियोथेरेपी योजना तैयार की जाती है।
कीमोथेरेपी के दौरान, पूरे शरीर में कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को मारने या पूरी तरह से नष्ट करने के लिए प्रभावशाली कीमो दवाओं को शरीर में प्रशासित किया जाता हैं। कीमोथेरेपी को मौखिक रूप से, इन्ट्रवीनस्ली (नस के माध्यम से) या इंट्रामस्क्युलर (मांसपेशियों के माध्यम से ) रुप से प्रशासित किया जा सकता है। एक प्रणालीगत चिकित्सा के रूप में, यह कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को पूरे शरीर में विभाजित होने से रोकती है या नष्ट कर देती है। एनल (गुदा) कैंसर मरीज़ों में, विभिन्न स्थितियों में कीमोथेरेपी दी जाती है:
सर्जरी से पहले, कीमोथेरेपी को रेडिएशन (विकिरण) के साथ जोड़ा जाता है (कीमोरेडिएशन) और प्रशासित किया जाता है। अक्सर एनल (गुदा) कैंसर मरीज़ों के लिए यह उपचार की पहली पंक्ति होती है। ज्यादातर मामलों में, यह दृष्टिकोण सर्जरी की आवश्यकता को दूर कर देता है।
कुछ मामलों में, सर्जरी के बाद कैंसर की कोई कोशिका (सेल्स) बची नहीं है यह सुनिश्चित करने के लिए कीमोरेडिएशन दिया जाता है। एडजुवेंट कीमोथेरेपी रिलैप्स (पुनरावर्तन) के जोखिम को कम करती है।
यदि एनल (गुदा) कैंसर वापस हो जाता है, तो डॉक्टर कीमोथेरेपी की सिफारिश कर सकते हैं। इसे सर्जरी के साथ संयोजित करके या बिना संयोजन के भी दिया जा सकता है।
यदि कैंसर उन्नत चरण में है और किडनी (गुर्दे), लीवर (यकृत) और लंग्ज (फेफड़ों) जैसे शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों में फैल गया है, तो उसकी वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए और लक्षणों और परेशानी से राहत देने के लिए कीमोथेरेपी की सिफारिश की जाती है।
हालांकि सर्जरी एनल (गुदा) कैंसर के उपचार की मुख्य पंक्ति नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में बीमारी के चरण के आधार पर सर्जरी के विकल्प का विचार किया जाता है।
शुरुआती अवस्था में, जब ट्यूमर का आकार छोटा होता है, तब डॉक्टर इसके इलाज के लिए सर्जरी की सिफारिश कर सकते हैं। प्रक्रिया के दौरान, डॉक्टर ट्यूमर के साथ इसके आसपास के स्वस्थ ऊतक की छोटी मात्रा को ऑपरेशन करके निकाल देते है। डॉक्टर एनल कनाल (गुदा नलिका) के आसपास की एनल (गुदा) स्फिंगक्टर मांसपेशियां जो मल त्याग को नियंत्रित करती हैं उनको नुकसान न पहुँचाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं। रोग के चरण के आधार पर, सर्जरी के साथ कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) की भी सिफारिश की जा सकती है।
कुछ मामलों में, जहां मरीज़ कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाते हैं या कैंसर के उन्नत चरणों में होते हैं, तब डॉक्टर एक अधिक व्यापक सर्जिकल प्रक्रिया की सिफारिश कर सकते हैं जिसे एब्डोमिनोपेरिनियल रिसेक्शन (एपी रिसेक्शन) कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, सर्जन रेक्टम (मलाशय) और कोलोन (बृहदान्त्र) के एक छोटे हिस्से के साथ एनल कनाल (गुदा नलिका) को निकाल देते है। बाद में, कोलोन (बृहदान्त्र) का शेष भाग पेट में स्टोमा से जोड़ा जाता है, जिसके माध्यम से अपशिष्ट शरीर से बाहर निकलता है और एक कोलोस्टोमी बैग में इकठ्ठा हो जाता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि शुरुआती पहचान मरीज़ों में सकारात्मक नैदानिक परिणामों की संभावना को बढाती है और जीवन की बेहतर गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता करती है।
एक अनुपचारित एनल (गुदा) कैंसर उन्नत स्थितियों में विकसित होता है और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों में फैलता है। यह कई स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बनता है और जीवित रहने की दर कम हो सकती है। इसलिए शुरुआती पहचान, कैंसर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह महत्वपूर्ण है कि किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें और आवश्यकता होने पर उचित कार्रवाई करें।
ऐसे कई उपाय हैं जो आपके एनल (गुदा) कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं। कुछ उपायों में सुरक्षित यौन आदतों का पालन करना, एचपीवी टीकाकरण प्राप्त करना, तम्बाकू छोड़ना और एक स्वस्थ जीवन शैली विकसित करना शामिल है।
यह दुष्प्रभाव हर मरीज़ में अलग अलग होते हैं। कुछ मरीज़ों को बहुत हल्के दुष्प्रभावों का अनुभव हो सकता है, जबकि कुछ मरीज़ों को मध्यम से गंभीर दुष्प्रभावों का अनुभव हो सकता है। एनल (गुदा) कैंसर के उपचार से जुड़े संभावित दुष्प्रभावों में दस्त, एनल (गुदा) में जलन और दर्द, मल त्याग में बाधा, मल त्याग के दौरान असुविधा, थकान, मतली, कब्ज, त्वचा में बदलाव, रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी, भूख न लगना, बालों का झड़ना आदि शामिल हैं।
कई मामलों में बवासीर और कैंसर में एक जैसे ही लक्षण दिखाई देते हैं, जिसके कारण मरीज़ लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। अंततः इसके कारण निदान में देरी हो सकती है और खराब नैदानिक परिणाम मिल सकते है। रेक्टल (मलाशय) में दर्द, खुजली और रक्तस्त्राव यह एनल (गुदा) कैंसर के मुख्य लक्षण हैं और इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। सामान्य तौर पर, आपके स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी असामान्यता के लिए तुरंत आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि यह किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए प्रारंभिक पहचान और समय पर उपचार में सहायता करता है।